“एक औरत हूँ……”

एक औरत हूँ…
औरत की परिभाषा जानती हूँ,
अपनी दहलीज़ और मर्यादा जानती हूँ,
मुझे दिशाहीन समझ दिशा का ज्ञान मत दो,
मौन हूँ मगर, तेरा हर इरादा जानती हूँ,

एक औरत हूँ…..

माँ की हर ख़ामोशी का सबब जानती हूँ,
पिता के आँखों की वो तड़प जानती हूँ,
तुम मुझे मेरी जिम्मेदारी मत समझाओ,
माँ के गर्भ से अब तक का सफ़र जानती हूँ,

एक औरत हूँ……

जो रात गुजरे हैं सन्नाटे में, वो पहर जानती हूँ,
दिन के उजाले में भी ख़ौफ़ज़दा वो नज़र जानती हूँ,
वो कसौटी की तराजू और खोखली परम्पराओं की बाट,
हर बार तौले जाने का कहर जानती हूँ,

एक औरत हूँ…..

घर की धूरी हूँ, हर रिश्ते संवारना जानती हूँ,
माना थक सी गयी हूँ, पर ख़ुद को संभालना जानती हूँ,
तू चाहे लाख़ कोशिश कर मेरा क़द छोटा करने की,
ख़ुद को ज़मीं से फ़लक़ तक उछालना जानती हूँ,

एक औरत हूँ…..

– श्वेता सिंह
(०९/०३/१७)

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Hi. This is Shweta Singh. I have completed my M.Sc. in Biotechnology from Banasthali Vidyapeeth, Jaipur. Then, completed Post Graduate Diploma in Bioinformatics from IBAB, Bangalore. I was working as a Bioinformatician in Bangalore itself. Currently, I am in Mumbai and working as a writer.

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